डेढ़ चम्मच ख्वाब

जो ऐसा हो कि बारिश में हमारी रूह भीगी हो
और चाय की दरकार हो गरमागरम

इक अदरक की डली यादों सी कड़वी हो
तिरछी नज़र जितनी कोई इलाईची हो
कुछ डेढ़ चम्मच ख्वाब मीठा रंग लायें

भीगी हुई सीमेंट वाली बेंच भी हो
धूप में बूढ़े हुए से लाल रंग की
झुर्रियां धुलकर की जैसे चमक जाएँ

रास्ते भीगे हुए जो खीचते हों
कदम जिन पर फिसलते हों रुक न पाएं
धानी धुले पत्तों से आखें चौधियाएं

पेड़ की डाली से कुछ बूँदें गिरें
प्याले में बड़ी सोंधी सी इक खुशबू घुले
बचने की कोशिश हो की प्याला छलक जाए.