The Legend of C***** Man

आप कुछ भी लिखें, कुछ भी कहें, कुछ भी बनाएं. पर शर्त ये है की आप किसी को नाराज़ न कर दें. दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में सेंसरशिप के नाम पर खुले आम तानाशाही होती है और हम 'फ्री स्पीच' पर बहस करते रह जाते हैं. जिस देश में फ्री स्पीच को लेकर आम समझ का नितांत अभाव हो, वहाँ ऐसी नौटंकी करना किसी भी सरकार के लिए ज़रा भी मुश्किल नहीं है. सरकारें बदलती हैं, मगर रवैया नहीं बदलता. आईटी सेल के एक सिपाही से लेकर सेंसर बोर्ड के मुखिया तक सब आपकी अभिव्यक्ति का गला घोटने के अधिकार से लैस हैं. बहस का विषय है की असली वज़ह तंत्र की बेशर्मी है या फिर अपने अधिकारों की सुरक्षा को लेकर हमारी लापरवाही. बुल्ले शाह कहते हैं, 'जो न जाने हक़ की ताकत, रब न देवे उसको हिम्मत.'

खैर ये सब छोडिये, आइये, आज के इस दौर के सुपरहीरो C***** Man और उसके कारनामों का उत्सव मनाएं. उनकी तानाशाही का और अपनी मजबूरी का मजाक उड़ायें. क्योंकि कम से कम इतना करने से तो कोइ हमें नहीं रोक सकता.