फिर उगेगी रोशनी

देखना फिर उगेगी रोशनी अंधेरे दरिया में से
जब हालातों की टक्कर से निकली चिंगारी
उम्मीदों के सूखे हुए ढेर में जा गिरेगी
और मातमी लहरों को चीरकर
अपने लाल पंखों से उड़ पड़ेगी आकाश की ओर
उमंग और जोश की एक चीख तोड़ देगी
सदियों से पसरा सन्नाटा
एक साथ टूटेंगी सारी जंग लगी सलाखें
आशाएं नाच उठेंगी
मरे हुए लोग अचानक फिर से जी उठेंगेअपनी खुशी से चौंधियाई आखों से
दुनिया को अचरज से देखेंगे
और वो जो सुबह के इंतज़ार में रात भर जागे थे
एक दुसरे को बाँहों में भर कर झूमने लगेंगे
उनकी आखों से नींद और थकान बह निकलेगी
और प्रकाश फिर उन उल्लासित आखों में
ख़्वाबों के बीज बो देगा.