मेरी कवितायें

मेरी कविताएँ वो संवाद हैं
जो कभी हुए ही नहीं
मेरी कवितायें वो छूटे हुए किस्से हैं
जो सालों तक करते रहे अपने पूरे होने की जिद
और फिर उनके भूत आने लगे मेरे ख़्वाबों में
मेरी कवितायें कुछ छूटे बचे टुकड़े हैं ख़्वाबों के
जो रात के अँधेरे में ख्वाब से टूटकर बिखर गए
और सुबह झाडू लगाते वक्त इधर उधर पड़े पाए गए
लेकिन मेरी कवितायें उन ख़्वाबों की याद भर नहीं हैं
मेरी कवितायें वो शुरुआत हैं जहां
कहानी ख़त्म होने से इनकार कर देती है
और किरदारों से आगे भी जीना चाहती है
मेरी कवितायें न अतीत हैं न भविष्य
और न ही वो आज जो कल सुबह अतीत बन जाएगा
मेरी कवितायें भूत और भविष्य के दूसरे छोर पर हैं
मेरी कवितायें अनंत हैं
असीम हैं.